Apr 3, 2013

कानून बना एंटी रेप लॉ बिल

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दुष्कर्म रोधी विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है. विधेयक में दुष्कर्म के लिए अधिक दंड, पीछा करने तथा घूरने को अपराध मानने तथा सहमति से यौन सम्बंध की उम्र को 18 वर्ष करने का प्रावधान है.
क्‍या-क्‍या है इस कानून में (एंटी रेप लॉ डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें )
- बलात्कार जैसे अपराधों के खिलाफ कड़ी सजा के प्रावधान करने के मकसद से नए कानून में कहा गया है कि अपराधी को कड़े कारावास की सजा तक दी जा सकती है जो 20 साल से कम नहीं होगी लेकिन इसे आजीवन कारावास तक में तब्दील किया जा सकता है.

- आजीवन कारावास का मतलब दोषी के प्राकृतिक जीवन काल तक है और इसमें जुर्माना भी भरना होगा.
- इस कानून में यह प्रावधान भी किया गया है कि ऐसे अपराधों के लिए पहले भी दोषी ठहराए गए अपराधियों को मौत की सजा दी जा सकती है.
- इस कानून में पहली बार, पीछा करने और घूर घूर कर देखने को गैर जमानती अपराध घोषित किया गया है, बशर्ते अपराधी दूसरी बार यह अपराध करते पकड़ा गया हो.
- तेजाबी हमला करने वालों को दस साल की सजा का भी कानून में प्रावधान किया गया है. इसमें पीड़ित को आत्म रक्षा का अधिकार प्रदान करते हुए तेजाब हमले की अपराध के रूप में व्याख्या की गयी है.
- कानून में सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र 18 साल तय की गयी है.
- महिला संगठनों की कड़ी मांग के मद्देनजर पीछा करने और घूर कर देखने के संबंध में कानून में नये प्रावधान किए गए हैं.
- इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि सभी अस्पताल बलात्कार या तेजाब हमला पीड़ितों को तुरंत प्राथमिक सहायता या मुफ्त उपचार उपलब्ध कराएंगे और ऐसा करने में विफल रहने पर उन्हें सजा का सामना करना पड़ेगा.
- कानून में न्यूनतम सात साल की सजा का प्रावधान किया गया है जो प्राकृतिक जीवन काल तक के लिए बढ़ाया जा सकती है और यदि दोषी व्यक्ति पुलिस अधिकारी है, लोक सेवक, सशस्त्र बलों या प्रबंधन या अस्पताल का कर्मचारी है तो उसे जुर्माने का भी सामना करना होगा.
- कानून में भारतीय साक्ष्य अधिनियम में संशोधन किया गया है जिसके तहत बलात्कार पीड़िता को, यदि वह अस्थायी या स्थायी रूप से मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम हो जाती है तो उसे अपना बयान दुभाषिये या विशेष एजुकेटर की मदद से न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराने की भी अनुमति दी गयी है. इसमें कार्यवाही की वीडियोग्राफी करने का भी प्रावधान किया गया है.
मुखर्जी ने मंगलवार को आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक 2013 को अपनी मंजूरी दे दी थी. इस विधेयक को राजधानी दिल्ली में पिछले वर्ष 16 दिसंबर को हुई नृशंस सामूहिक बलात्कार की घटना पर राष्ट्रीय स्तर पर उपजे आक्रोश की पृष्ठभूमि में लाया गया था. अब इसे ‘आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम 2013’ के नाम से जाना जाएगा. एक सरकारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गयी है.
इस विधेयक को लोकसभा ने 19 मार्च को तथा राज्यसभा ने 21 मार्च को पारित किया था. इस संबंध में तीन फरवरी को अध्यादेश जारी किया गया था. इस विधेयक के जरिए भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम तथा यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम में संशोधन किए गए हैं.

INFOLINK